अंबिकापुर-मैनपाट की सड़कों पर मौत का तांडव: “सड़क छाप बाइकर्स गैंग” के ‘हुड़दंग’ पर मूकदर्शक क्यों हैं इनके समर्थक? पुलिस ने की अपने स्टाइल में कर्रावाई तो पेट में होने लगा दर्द
अंबिकापुर/मैनपाट: सरगुजा के अंबिकापुर और मैनपाट की सड़कों पर इन दिनों एक तथाकथित ‘बाइकर्स गैंग’ का आतंक चरम पर है। अपनी जान और दूसरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर ये आवारा बाइकर्स जिस तरह सड़कों पर हुड़दंग मचा रहे हैं, उसने आम जनता का जीना दूभर कर दिया है।

कार्रवाई हुई तो खड़ा हुआ नया विवाद
जब इन सड़क छाप बाइकर्स का खतरनाक वीडियो सामने आया, तो जनता ने आक्रोशित होकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कड़ी कार्रवाई की मांग की। जनता की मांग पर जब सरगुजा पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए इन उपद्रवियों को सबक सिखाना शुरू किया, तो अचानक एक नया वर्ग सक्रिय हो गया है।
अब कुछ लोग पुलिसकर्मी द्वारा की गई कार्रवाई के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्दों को मुद्दा बना रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस ने ‘अमर्यादित’ भाषा का प्रयोग किया है। सवाल यह है कि जो लोग इस विवाद को तूल दे रहे हैं, क्या उनका ध्यान सड़क पर इन बाइकर्स द्वारा मचाए जा रहे उत्पात की ओर है?
सड़क हादसों का जिम्मेदार कौन?
यह स्थिति वाकई हैरान करने वाली है। एक तरफ ये बाइकर्स गैंग जानलेवा स्टंट करके मौत को दावत दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी इस करतूत पर पर्दा डालने वाले और पुलिस के लहजे पर उंगली उठाने वाले लोग अब चर्चा का केंद्र हैं।

सीधा सवाल: यदि इन बाइकर्स गैंग की लापरवाही के कारण सड़क हादसों में किसी निर्दोष की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा? क्या वे लोग, जो आज पुलिस की सख्ती पर सवाल खड़े कर रहे हैं, उस पीड़ित परिवार के नुकसान की भरपाई करेंगे?
जनता का रुख
स्थानीय लोगों का मानना है कि जो बाइकर्स कानून का सम्मान नहीं करते, वे केवल नरमी की भाषा नहीं समझते। अगर पुलिस की सख्ती से इन उपद्रवियों पर लगाम लगती है, तो इसे ‘अमर्यादित’ बताने के बजाय ‘आवश्यक’ माना जाना चाहिए। सरगुजा पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभा रही है, लेकिन समाज के उन लोगों को भी आईना देखने की जरूरत है जो अपराधियों के बचाव में खड़े होकर कानून-व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं।
सड़क सुरक्षा के नियमों की अनदेखी करना किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। यदि समय रहते इन ‘फटीचर’ बाइकर्स पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में बड़ी त्रासदी से इंकार नहीं किया जा सकता।
