July 29, 2026

सीतापुर में रेत का ‘अवैध राज’ प्रतापगढ़ में प्रशासन की नाक के नीचे पनप रहा माफिया का काला साम्राज्य, माफिया के आगे नतमस्तक सिस्टम!

0
20260715_170028
Spread the love

अंबिकापुर/सीतापुर| सरकार की लाख सख्ती और बड़े-बड़े दावों के बावजूद सीतापुर का रेत माफिया बेखौफ है। सिस्टम के गलियारों में बैठे जिम्मेदारों की कथित मिलीभगत ने रेत माफिया को इतनी ताकत दे दी है कि वे न केवल कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध रेत का साम्राज्य खड़ा कर दिया है।

​प्रतापगढ़ में ‘अवैध रेत’ का खेल, प्रशासन मौन

ताज़ा मामला सीतापुर के प्रतापगढ़ क्षेत्र से सामने आया है। यहाँ बड़े पैमाने पर रेत का अवैध भंडारण किया गया है। स्थानीय लोगों की मानें तो सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद, आसपास की खदानों से रातों-रात अवैध उत्खनन कर भारी मात्रा में रेत डंप की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि ये सब कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और खनिज विभाग की जानकारी में हो रहा है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब ‘मौन’ साधे हुए हैं।

काली कमाई का खेल: प्रतिबंध लगा तो बढ़ गई ‘मुनाफे की भूख’

रेत माफियाओं की चालाकी देखिए जैसे ही सरकार ने उत्खनन और भंडारण पर पाबंदी लगाई, माफियाओं ने इसे एक अवसर में बदल दिया। अब इस अवैध रेत को मनमाने और महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच हो, तो घोटाले का आंकड़ा इतना बड़ा होगा कि सरकार के भी होश उड़ जाएंगे। इस काली कमाई का हिस्सा सिस्टम के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है, शायद यही कारण है कि माफियाओं पर हाथ डालने की हिम्मत कोई नहीं जुटा पा रहा।

​’सफेदपोश’ का वरदहस्त?

प्रतापगढ़ में हो रहे इस अवैध कारोबार के पीछे केवल माफियाओं का ही हाथ नहीं है, बल्कि चर्चा यह भी है कि इन्हें रसूखदार ‘सफेदपोशों’ का खुला संरक्षण प्राप्त है। बिना किसी राजनीतिक और प्रशासनिक साठगांठ के इतनी बड़ी मात्रा में रेत का अवैध उत्खनन और खुलेआम भंडारण संभव ही नहीं है।

इन सवालों के घेरे में है प्रशासन:

खनिज विभाग की चुप्पी क्यों? जब प्रतापगढ़ में रेत के ऊंचे ढेर खुलेआम नजर आ रहे हैं, तो खनिज विभाग के अधिकारी क्या अंधे हैं? जबकि क्षमता से अधिक और नियमों को ताक पर रखकर हाइवा के जरिए रेत का परिवहन कब तक चलता रहेगा? आखिर वह कौन सी अदृश्य ताकत है, जो प्रतापगढ़ के रेत माफियाओं को कानून से ऊपर बनाए हुए है?क्या प्रशासन इस अवैध कारोबार में अपनी संलिप्तता का प्रमाण दे रहा है, या फिर यह महज एक प्रशासनिक नाकामी है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!