July 29, 2026

स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज

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रायपुर। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सरकारी स्कूलों में सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र जैसे मंत्रोच्चार अनिवार्य करने के राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को आज खारिज कर दिया।

राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि 12 जून 2026 को जारी किया गया सर्कुलर अभी प्रदेश के किसी भी स्कूल में लागू नहीं किया गया है। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने कहा कि फिलहाल इस पर हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। उच्च न्यायालय के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह याचिका पूर्व वक्फ बोर्ड अध्यक्ष अब्दुल सलाम रिज़वी और अन्य लोगों द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं के वकील डॉ. अमीर खान ने दलील दी थी कि स्कूलों में मंत्रोच्चार अनिवार्य करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 का उल्लंघन है, जो सरकारी संस्थानों में धार्मिक शिक्षा देने पर रोक लगाता है। याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील थी कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 28(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि पूर्ण रूप से सरकारी फंड से चलने वाले शिक्षण संस्थानों में किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती। किसी एक धर्म विशेष के मंत्रों को अनिवार्य करना राज्य की धार्मिक तटस्थता के खिलाफ है।

राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि 12 जून 2026 को जारी किया गया यह सर्कुलर अभी प्रदेश के किसी भी स्कूल में लागू नहीं किया गया है। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने कहा कि फिलहाल इस पर हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को सरकारी स्कूलों में हिंदू प्रार्थनाएं या मंत्र पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सर्कुलर में उन छात्रों के लिए कोई छूट नहीं दी गई थी जो अपनी धार्मिक मान्यताओं के कारण इसमें शामिल नहीं होना चाहते। अदालत ने साफ किया कि किसी भी बच्चे को सरकारी स्कूल में हिंदू प्रार्थनाएं पढ़ने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि भविष्य में किसी भी स्कूल में बच्चों को जबरन मंत्रोच्चार कराने के ठोस साक्ष्य (जैसे वीडियो या दस्तावेज) सामने आते हैं, तो वे सबूतों के साथ नई याचिका दायर कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून 2026 को शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए एक सर्कुलर जारी किया गया था। इसके तहत स्कूल के पूरे दिन की गतिविधियों को तीन विशिष्ट हिस्सों (सुबह, दोपहर और छुट्टी के समय) में बांटा गया था। स्कूलों को कुल 10 गतिविधियों और मंत्रों को शामिल करने का निर्देश दिया गया। सुबह की असेंबली में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीप मंत्र, सरस्वती वंदना और गुरुमंत्र पढ़ने का निर्देश है। इसके साथ ही महापुरुषों की जीवनियां पढ़ना अनिवार्य किया गया। मध्याह्न भोजन शुरू करने से पहले ‘भोजन मंत्र’ तथा स्कूल की छुट्टी होने से ठीक पहले ‘गायत्री मंत्र’ और ‘शांति मंत्र’ का पाठ करने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार का कहना था कि इसका उद्देश्य छात्रों का बौद्धिक विकास करना और उन्हें भारतीय संस्कृति व मूल्यों से जोड़ना है।

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