July 29, 2026

अंबिकापुर में ‘सफेदपोश’ राशन माफिया: क्या खाद्य विभाग ने बेच दी है अपनी ‘आंखें’? FIR के बाद भी बेखौफ जारी है ‘अरुण ट्रेडर्स’ का काला कारोबार

0
20260716_134904
Spread the love

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में गरीबों के हक का राशन डकारने वाले माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि कानून की कार्रवाई का भी उन पर कोई असर नहीं दिख रहा। सरकारी अनाज की कालाबाजारी के केंद्र बने ‘अरुण ट्रेडर्स’ पर पूर्व में FIR दर्ज होने के बावजूद, यहाँ आज भी धड़ल्ले से अवैध पीडीएस चावल की खरीद-फरोख्त जारी है। खाद्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इस गोरखधंधे ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अरुण ट्रेडर्स: FIR बेअसर, अवैध मंडी का बना केंद्र

शहर के खरसिया चौक स्थित ‘अरुण ट्रेडर्स’ एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। इस संस्थान के संचालक के खिलाफ पूर्व में कानूनी कार्रवाई और FIR दर्ज हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसके बाद भी अवैध कारोबार रुकने के बजाय और तेजी से फलता-फूलता दिख रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यहाँ आए दिन स्कूटी, कार और अन्य वाहनों से सरकारी राशन की बोरियाँ पहुंचाई जा रही हैं। यह साफ दर्शाता है कि प्रशासन की पिछली कार्रवाई केवल कागजी खानापूर्ति साबित हुई है।

रीसाइकलिंग का ‘गंदा खेल’

इस घोटाले के पीछे एक सुनियोजित चक्र काम कर रहा है। पीडीएस दुकान संचालक जरूरतमंदों के राशन कार्डधारियों से ओने-पौने दाम पर अनाज खरीदकर उसे अरुण ट्रेडर्स तक पहुँचाते हैं। इसके बाद, इस चावल को राइस मिलर्स के माध्यम से पॉलिश करवाकर और पैकिंग बदलकर दोबारा बाजार में खपा दिया जाता है। इस ‘रीसाइकलिंग’ प्रक्रिया में चावल की गुणवत्ता इतनी गिर जाती है कि वह खाने योग्य भी नहीं रह जाता, लेकिन मुनाफा कमाने की अंधी दौड़ में माफिया गरीबों की सेहत और उनके हक के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।

सवालों के घेरे में खाद्य विभाग की चुप्पी

अरुण ट्रेडर्स के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिलने और पुख्ता सबूत होने के बावजूद खाद्य विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली गहरे संदेह पैदा करती है। यह सवाल अब जनमानस में उठ रहा है कि आखिर इस संस्थान को किसका संरक्षण प्राप्त है? बार-बार पकड़े जाने के बाद भी इसका लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किया जा रहा?प्रशासन कब तक केवल छोटी-मोटी जब्ती कर मामले को रफा-दफा करता रहेगा? और क्या गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले इन माफियाओं पर ‘रासुका’ जैसी सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज होगा?

अंबिकापुर की जनता अब जवाब चाहती है। 

गरीबों के पेट पर लात मारकर अपनी तिजोरियां भरने वाले इन ‘धन्नासेठों’ पर ठोस कार्रवाई न होना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रहा है। क्या खाद्य विभाग अब अपनी चुप्पी तोड़ेगा और इस पूरे रैकेट की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी नकेल कसेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!