मैनपाट की प्रस्तावित सीएमडीसी खदानें हो सकती हैं निरस्त: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिले विधायक रामकुमार टोप्पो,पर्यटन, पर्यावरण और ग्रामीण हितों का रखा पक्ष, सरकार ने गंभीरता से लिया मामला
रायपुर। छत्तीसगढ़ का मिनी शिमला और प्रमुख पर्यटन स्थल कहे जाने वाले मैनपाट में प्रस्तावित सीएमडीसी (छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम) की खदानों का मामला अब प्रदेश सरकार के सर्वोच्च स्तर तक पहुंच गया है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं कैबिनेट मंत्रियों से भेंट कर मैनपाट की प्रस्तावित खदानों से जुड़े संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने क्षेत्र के पर्यटन, पर्यावरण, धार्मिक स्थलों और स्थानीय ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी पहल की है।

जनसुनवाई में विरोध के बाद विधायक का कड़ा रुख
हाल ही में मैनपाट में सीएमडीसी द्वारा आयोजित लोक जनसुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने प्रस्तावित खदानों का पुरजोर विरोध किया था। जनसुनवाई में स्वयं उपस्थित विधायक रामकुमार टोप्पो ने ग्रामीणों की आपत्तियों को गंभीरता से लेते हुए प्रस्तावित खदानों से संबंधित दस्तावेजों एवं सर्वे रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण कराया।
शासन को गुमराह करने का आरोप: तथ्यों को छिपाने की बात आई सामने
विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री के समक्ष साक्ष्य रखते हुए बताया कि प्रस्तावित खदान क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख पर्यटन स्थल, धार्मिक आस्था के केंद्र तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का समुचित उल्लेख विभागीय दस्तावेजों में नहीं किया गया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि इस प्रकार शासन को गुमराह किया गया है और इन तथ्यों के अभाव में वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सकी। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष समीक्षा कर जनभावनाओं एवं मैनपाट के पर्यटन महत्व को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

वर्ष 1984 के बाद लिया जा सकता है सबसे बड़ा ऐतिहासिक निर्णय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं उपस्थित मंत्रियों ने विधायक द्वारा उठाए गए बिंदुओं को अत्यंत गंभीरता से सुना। सरकार ने मैनपाट के पर्यटन महत्व, पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय ग्रामीणों के हितों को सर्वोपरि बताते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा का भरोसा दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों की जांच के बाद इन प्रस्तावित खदानों को निरस्त किया जा सकता है। यदि ऐसा निर्णय होता है, तो वर्ष 1984 से अब तक के खदान लीज के इतिहास में इसे छत्तीसगढ़ सरकार का सबसे ऐतिहासिक और जनहितैषी निर्णय माना जाएगा। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो द्वारा लिए गए इस त्वरित संज्ञान की शीर्ष नेतृत्व द्वारा सराहना की जा रही है।
मैनपाट की अस्मिता से समझौता नहीं: रामकुमार टोप्पो
इस संवेदनशील विषय पर कड़ा रुख अपनाते हुए विधायक रामकुमार टोप्पो ने कहा:
”मैनपाट केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की अनमोल पहचान है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था, पर्यावरण और स्थानीय ग्रामीणों के हितों का संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। विकास आवश्यक है, लेकिन वह जनभावनाओं और प्रकृति की बलि देकर नहीं होना चाहिए। मैनपाट की अस्मिता और यहाँ के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर लड़ाई जारी रहेगी।”
