अंबिकापुर: गरीबों के निवाले पर ‘डाका’, अरुण ट्रेडर्स पर फिर प्रशासन का चाबुक; क्या इस बार टूटेगी माफिया की कमर? बड़ी मात्रा में PDS चावल बरामद
@Sumit Singh
अंबिकापुर: सरकारी राशन की कालाबाजारी का ‘गंदा खेल’ एक बार फिर बेनकाब हुआ है। खरसिया चौक स्थित ‘अरुण ट्रेडर्स’ पर जिला राजस्व विभाग और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापामार कार्रवाई कर 130 बोरी पीडीएस चावल जब्त किया है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व में FIR दर्ज होने के बावजूद, संचालक अरुण बंसल बेखौफ होकर अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था।

छापेमारी: प्रशासन देखते ही फरार हुआ चावल माफिया
जैसे ही प्रशासनिक अमला खरसिया चौक स्थित ‘अरुण ट्रेडर्स’ के कैंपस में दाखिल हुआ, वहां हड़कंप मच गया। परिसर में खड़े ट्रक में भारी मात्रा में सरकारी चावल लोड किया जा रहा था। प्रशासनिक टीम को अपनी ओर आता देख संचालक अरुण बंसल गोदाम में ताला लगाकर मौके से रफूचक्कर हो गया और टीम देखती रह गई। फिलहाल, प्रशासन ने दुकान और गोदाम को सील कर दिया है। ट्रक में लोड चावल को जब्त कर लिया है।

रीसाइकलिंग का ‘काला कारोबार’
PDS चावल की यह कोई छोटी-मोटी चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘रीसाइकलिंग रैकेट’ है। इस खेल में पीडीएस दुकानों से जरूरतमंदों का अनाज सस्ते दाम पर खरीदकर उसे राइस मिलर्स के जरिए पॉलिश करवाया जाता है और बोरियां बदलकर इसे ‘ओपन मार्केट’ में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है। यही नही बड़े पैमाने पर चावल को रिसाइक्लिंग कर पुनः शासकीय उच्य मूल्य की दुकानों में खपा दिया जाता है। इस प्रक्रिया में चावल की गुणवत्ता इतनी गिर जाती है कि वह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो जाता है, फिर भी माफिया मुनाफे की अंधी दौड़ में गरीबों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे बड़े सवाल
शहर में अब जन-चर्चा का विषय यह है कि बार-बार पकड़े जाने और FIR के बावजूद अरुण बंसल का काला कारोबार फल-फूल कैसे रहा है। सवाल है कि आखिर किस रसूख के दम पर यह माफिया प्रशासन को ठेंगा दिखा रहा है और बार-बार सरकारी अनाज की हेराफेरी के सबूत मिलने के बाद भी इसका लाइसेंस अब तक निरस्त क्यों नहीं किया गया है। क्या प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ कागजी जब्ती तक सीमित रहेगी या इस बार इस सिंडिकेट के मास्टरमाइंड पर ‘रासुका’ जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई होगी?




जनता की मांग: कार्रवाई हो तो ऐसी, जो नजीर बने
कानूनी पेच: क्या इस बार होगी कड़ी कर्रावाई
अरुण बंसल के खिलाफ पूर्व में FIR दर्ज होने के बावजूद, फिर से वही अपराध दोहराने के कारण अब यह चर्चा तेज है कि क्या इस बार चावल माफिया अरुण बंसल के खिलाफ प्रशासन कड़ी कर्रावाई कर जेल भेजेगा। या फिर अपनी सेटिंग जमाकर चावल माफिया अरुण बंसल प्रशासन के चंगुल और कानूनी दांवपेंच से बच जायेगा।
