गरीबों का राशन, धन्नासेठ का ‘धंधा’: कब तक कानून के मुंह पर तमाचा मारते रहेंगे ये माफिया? PDS चावल की रीसाइकलिंग का ‘महा-घोटाला’, जिम्मेदार मौन
अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में राशन माफियाओं का दुस्साहस चरम पर है। गरीबों के पेट के लिए सरकार द्वारा भेजे जाने वाले मुफ्त चावल की खुलेआम हेराफेरी की जा रही है। यह काला कारोबार कोई और नहीं, बल्कि राशन दुकान (सोसायटी) के संचालक और कुछ रसूखदार ‘ट्रेडर्स’ मिलकर चला रहे हैं। हद तो यह है कि यह पूरा खेल खाद्य विभाग की नाक के नीचे चल रहा है, लेकिन विभाग की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

अरुण ट्रेडर्स बना अवैध मंडी का केंद्र
शहर के खरसिया चौक स्थित ‘अरुण ट्रेडर्स’ इस पूरे गोरखधंधे का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहाँ रोजाना स्कूटी, कार और अन्य वाहनों से आसपास की सरकारी राशन दुकानों का चावल धड़ल्ले से पहुँचाया जा रहा है। राशन दुकान के संचालक जरूरतमंदों को राशन देने के बजाय अपना हिस्सा और हितग्राहियों का राशन सीधे इस ट्रेडर्स को बेच रहे हैं। बदले में उन्हें मोटी रकम मिलती है, और गरीब अपनी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रह जाते हैं।

रीसाइकलिंग का ‘गंदा खेल’
इस घोटाले का सबसे खतरनाक पहलू चावल की ‘रीसाइकलिंग’ है। पीडीएस संचालक राशन कार्डधारियों को ओने-पौने दाम देकर उनका चावल खरीद लेते हैं। यह चावल अरुण ट्रेडर्स जैसे व्यापारियों के पास जमा होता है। ट्रेडर्स इसे राइस मिलर्स को भेजते हैं, जहाँ इसकी पॉलिश और पैकिंग बदलकर इसे पुनः नए चावल के रूप में तैयार किया जाता है। यही रीसाइकिल किया हुआ घटिया चावल वापस पीडीएस दुकानों में पहुँच जाता है।इसी वजह से राशन दुकानों में मिलने वाले चावल की गुणवत्ता रसातल में चली गई है। कई बार तो यह चावल खाने योग्य भी नहीं होता, लेकिन गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाकर यह माफिया अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
विभाग की कार्रवाई केवल खानापूर्ति?
सूत्रों की मानें तो इस अवैध कारोबार की मलाई खाद्य विभाग के कुछ अधिकारियों तक भी पहुँचती है, जिसके चलते उन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं होती। अरुण ट्रेडर्स के खिलाफ पूर्व में भी खाद्य विभाग द्वारा कार्रवाई की जा चुकी है, लेकिन वह महज कागजी और ‘नाममात्र’ की रही। शायद यही कारण है कि माफियाओं का मनोबल इतना बढ़ चुका है कि वे अब दिनदहाड़े इस काले धंधे को अंजाम दे रहे हैं।
क्यो न उठे ये सवाल
क्या खाद्य विभाग इस पूरे रैकेट की निष्पक्ष जांच कराएगा? बार-बार पकड़े जाने के बाद भी अरुण ट्रेडर्स का लाइसेंस निरस्त क्यों नहीं किया जा रहा? क्या गरीबों के हक का राशन डकारने वाले इन माफियाओं पर सख्त कानूनी कार्रवाई और ‘रासुका’ जैसी धाराओं के तहत मामला दर्ज होगा? अंबिकापुर की जनता अब जवाब चाहती है। गरीबों के निवाले से खिलवाड़ करने वाले ये ‘धन्नासेठ’ कब तक कानून की आंखों में धूल झोंकते रहेंगे?
1.अरुण ट्रेंड्स के मालिक
जब उनसे मामले पर पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया, तो उन्होंने फोन पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं फोन पर वर्जन नहीं देता, आप दुकान पर आइए, फिर बात करते हैं।”
2. एस. काम्टे (जिला खाद्य अधिकारी)
इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी एस. काम्टे से संपर्क करने की कोशिश की गई। उन्हें पाँच बार फोन लगाया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
3. बनसिंह नेताम (एसडीएम, अंबिकापुर)
एसडीएम अंबिकापुर बनसिंह नेताम से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि वे फिलहाल ट्रेनिंग के सिलसिले में हैदराबाद में हैं। आप तहसीलदार को फोन लगा लीजिए
