महावीर हॉस्पिटल पर कार्रवाई की खबर: आदेश हुआ स्पष्ट, जनसंपर्क विभाग के दावे पर लगी मुहर
अंबिकापुर: श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ जिला प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर जो असमंजस और सवाल खड़े हुए थे, वे अब आधिकारिक आदेश सामने आने के बाद दूर हो गए हैं। जनसंपर्क विभाग द्वारा 13 अक्टूबर को जारी की गई सूचना पूरी तरह सत्य और प्रामाणिक पाई गई है, क्योंकि कलेक्टर कार्यालय, द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है।


क्या है आधिकारिक आदेश में?
कार्यालय कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार श्री महावीर हॉस्पिटल के खिलाफ गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही और आयुष्मान योजना के तहत अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। आवेदिका गृष्मणी पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत शिकायत और जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई है।
नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन के कारण श्री महावीर हॉस्पिटल का पंजीयन दिनांक 17 अक्टूबर 2026 से 16 नवंबर 2026 तक एक माह के लिए निलंबित कर दिया गया है।

जबकि आयुष्मान योजना के तहत मरीज के परिजनों से अवैध रूप से लिए गए 87,300 रुपये अस्पताल को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं।वही स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशों के परिपालन में, आगामी तीन माह के लिए आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल का पंजीयन निलंबित किए जाने हेतु शासन को प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है।
जांच में पाई गई मुख्य कमियां
अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में न्यूरो सर्जरी की सुविधा का उल्लेख नहीं था और न ही ऑपरेशन करने वाले न्यूरो सर्जन का नाम विधिवत दर्ज था। इसके अलावा, पहले दी गई कमियों को सुधारने के लिए दिए गए एक महीने के समय के भीतर आदेश का पालन अस्पताल द्वारा नहीं किया गया।
आयुष्मान योजना में अनियमितता
दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि आयुष्मान कार्ड से इलाज हेतु संपूर्ण राशि काटने के बाद भी मरीज से अतिरिक्त अवैध राशि 87,300 रुपये वसूली गई, और पूर्व में भी ऐसी शिकायतें मिलने पर अस्पताल को कड़ी चेतावनी दी जा चुकी थी।
कलेक्टर के लिखित आदेश से स्पष्ट, जनसंपर्क विभाग की सूचना पूरी तरह तथ्यात्मक और वैध
शुरुआत में नोडल अधिकारी और अस्पताल प्रबंधन द्वारा आदेश की जानकारी न होने की बात कहकर असमंजस की स्थिति पैदा की गई थी, जिसके कारण जनसंपर्क विभाग की भूमिका पर सवाल उठे थे। परंतु अब कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी लिखित और आधिकारिक आदेश सामने आ जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि जनसंपर्क विभाग द्वारा जारी की गई सूचना पूरी तरह तथ्यात्मक और वैध थी। जिला प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले निजी अस्पतालों में हड़कंप मच गया है।
