अंबिकपुर कोतवाली के ‘छोटे बाबू’ निष्क्रिय, पुलिस गश्त की खुली पोल: डीजे की कानफोड़ू आवाज से बेखबर रहा थाना, मना करने पर महिला और नाबालिग पर धारदार हथियार से हमला
अंबिकापुर (छत्तीसगढ़): शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत घुटरापारा में गणेश विसर्जन के दौरान डीजे के तेज साउंड को लेकर शुरू हुआ मामूली विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। तेज आवाज में बज रहे डीजे और चोंगे को कम कराने की बात पर भड़के आरोपियों ने एक महिला और 17 वर्षीय किशोर पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। घटना में घायल बालक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
डीजे साउंड कम कराने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार, घटना कल रात लगभग 8 बजे घुटरापारा में उस समय घटी जब गणेश विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। मोहल्ले में डीजे और चोंगा काफी तेज आवाज में बजाया जा रहा था। जब स्थानीय निवासियों ने डीजे की आवाज कम करने को कहा, तो आरोपी पक्ष बहस और गाली-गलौज पर उतारू हो गया। बीच-बचाव करने पहुंचे मंजू गुप्ता और उनके 17 वर्षीय बेटे अंकित गुप्ता पर आरोपियों ने धारदार हथियार से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में महिला के दोनों हाथों में चोटें आई हैं, जबकि उनका बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल के आईसीयू में दाखिल कराया गया।
घटना का सीसीटीवी फुटेज आया सामने, थाने में शिकायत दर्ज
इस पूरी हिंसा का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें मारपीट और हमले की वारदात स्पष्ट दिखाई दे रही है। घटना के बाद पीड़ितों ने कोतवाली थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित महिला मंजू गुप्ता और उनके परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
कोतवाली पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल
गणेश उत्सव के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाने पर प्रतिबंध और नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए गए थे। इसके बावजूद रिहायशी इलाके में देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजना और विरोध करने पर सरेराह जानलेवा हमला हो जाना, स्थानीय पुलिस की गश्त व निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे कोतवाली पुलिस की सुस्त कार्यशैली को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और डीजे संचालकों पर लगाम कसने में पुलिस तंत्र पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।
