October 22, 2026

श्री महावीर हॉस्पिटल को बड़ी राहत: सील करने के आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, फिलहाल जारी रहेगा संचालन

0
20261017_081515
Spread the love

अंबिकापुर में श्री महावीर हॉस्पिटल के लाइसेंस निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट का स्थगन; चिकित्सकीय लापरवाही और आयुष्मान योजना में अनियमितता के आरोपों से जुड़ा मामला अब न्यायालय में विचाराधीन

अंबिकापुर। शहर के श्री महावीर हॉस्पिटल को सील करने के स्वास्थ्य विभाग के आदेश पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। अस्पताल प्रबंधन को मिली इस कानूनी राहत के बाद फिलहाल अस्पताल को सील करने की कार्रवाई पर विराम लग गया है। 15 अक्टूबर को मामले की सुनवाई के बाद 16 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की पीठ ने स्थगन आदेश पारित किया। हालांकि, मामले में अंतिम निर्णय अभी नहीं आया है और प्रकरण हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

स्वास्थ्य विभाग ने एक माह के लिए निलंबित किया था लाइसेंस

दरअसल, स्वास्थ्य विभाग ने 13 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश में श्री महावीर हॉस्पिटल का लाइसेंस/पंजीयन 17 अक्टूबर से 16 नवंबर 2026 तक एक माह के लिए निलंबित करने का निर्णय लिया था। विभाग ने यह कार्रवाई एक मरीज की मौत के मामले में प्राप्त शिकायत और जांच प्रतिवेदन के आधार पर की थी।

शिकायतकर्ता सुश्री मृण्मयी पाण्डेय ने अस्पताल प्रबंधन पर मेडिकल रिपोर्ट, सीटी स्कैन, एक्स-रे और रेफरल/डेथ समरी उपलब्ध नहीं कराने, आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद इलाज के लिए अतिरिक्त राशि वसूलने तथा उचित उपचार नहीं मिलने के कारण मरीज की मौत होने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों की जांच के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, अंबिकापुर के माध्यम से टीम गठित की गई थी।

न्यूरो सर्जरी और रेफरल प्रक्रिया पर उठे थे सवाल

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के अनुसार, जांच में अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में मरीज की मस्तिष्क की न्यूरो सर्जरी करने वाले चिकित्सक का नाम दर्ज नहीं पाया गया। विभाग ने यह भी उल्लेख किया कि अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में न्यूरो सर्जरी की सुविधा का उल्लेख नहीं था और संबंधित चिकित्सकीय सेवाएं शुरू करने से पहले स्वास्थ्य विभाग को सूचना दिए जाने के प्रमाण नहीं मिले।

जांच प्रतिवेदन में मरीज के रेफरल की प्रक्रिया का सही तरीके से पालन नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया था। विभाग ने इन तथ्यों को नर्सिंग होम एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन से जोड़ते हुए अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की थी।

आयुष्मान योजना में 87,300 रुपये लेने का उल्लेख

स्वास्थ्य विभाग के आदेश में आयुष्मान योजना के तहत मरीज के उपचार की पूरी राशि बुक किए जाने के बाद परिजनों से कथित तौर पर 87,300 रुपये अतिरिक्त लिए जाने का उल्लेख है। विभाग ने इस राशि को वापस करने के निर्देश दिए थे। साथ ही, अस्पताल के खिलाफ पूर्व में भी मरीज से अधिक राशि लेने की शिकायत मिलने और चेतावनी जारी किए जाने का हवाला दिया गया था।

इन्हीं निष्कर्षों के आधार पर विभाग ने अस्पताल का पंजीयन एक माह के लिए निलंबित करने के साथ ही आयुष्मान योजना एवं खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत तीन माह तक पंजीयन निलंबित करने के लिए शासन को प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए थे।

हाईकोर्ट के स्थगन आदेश से अस्पताल प्रबंधन को राहत

स्वास्थ्य विभाग के आदेश के बाद अस्पताल को सील किए जाने की आशंका के बीच मामला हाईकोर्ट पहुंचा। अस्पताल से संबंधित आदेशों को चुनौती दिए जाने के बाद न्यायालय ने 16 अक्टूबर को स्थगन आदेश पारित कर दिया। इसके बाद फिलहाल अस्पताल को सील करने की कार्रवाई पर रोक लग गई है।

अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वह फिलहाल इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं कर सकता।

भर्ती मरीजों और परिजनों ने ली राहत की सांस

अस्पताल को सील किए जाने की कार्रवाई की खबर सामने आने के बाद वहां भर्ती गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और उनके परिजनों के बीच असमंजस की स्थिति बन गई थी। हाईकोर्ट से स्थगन आदेश मिलने के बाद अस्पताल में उपचार करा रहे मरीजों और अस्पताल प्रबंधन को राहत मिली है।

हालांकि, इस पूरे मामले में चिकित्सकीय लापरवाही और आयुष्मान योजना के तहत कथित अतिरिक्त वसूली से जुड़े आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष आना बाकी है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के बाद अस्पताल को सील करने की कार्रवाई पर रोक है और मामले की आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!