कुबेरपुर सड़क हादसा: पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचीं मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
गिट्टी लोड ट्रैक्टर और क्रशर संचालन की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश, बिना ठोस साक्ष्य ग्रामीणों को गिरफ्तार करने और हिरासत में मारपीट पर जताई सख्त नाराजगी
सूरजपुर/कुबेरपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के चांदनी बिहारपुर क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुबेरपुर में सड़क हादसे में महिला चंद्रावती जायसवाल की मौत के बाद उपजे तनाव को लेकर कैबिनेट मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक लक्ष्मी राजवाड़े ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार सुबह पीड़ित परिवार से मिलने कुबेरपुर पहुंचीं मंत्री ने परिजनों को सांत्वना दी और मामले में निष्पक्ष जांच तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधिकारियों और ग्रामीणों को आमने-सामने बैठाकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।

हादसे के लिए जिम्मेदार चालक पर कठोर कार्रवाई की मांग
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने महिला की मौत को दुखद बताते हुए हादसे के लिए जिम्मेदार ट्रैक्टर चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ट्रैक्टर के दस्तावेज, क्रशर संचालन और गिट्टी परिवहन की वैधता की जांच करने तथा अनियमितता सामने आने पर ट्रैक्टर मालिक सहित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
ग्रामीणों की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
ग्रामीणों ने मंत्री के समक्ष शिकायत की कि हादसे के बाद उपजे तनाव और आगजनी की घटना के मामले में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई करते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। ग्रामीणों ने निर्दोष लोगों को घरों से उठाए जाने और कार्रवाई के दौरान कथित दुर्व्यवहार की भी शिकायत की।

ग्रामीणों की बातें सुनने के बाद मंत्री ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया कि यदि आगजनी की घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकती है, तो हादसे में शामिल ट्रैक्टर और उसके मालिक के साथ ही गिट्टी परिवहन तथा क्रशर संचालन की वैधता की जांच क्यों नहीं की गई? उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए और किसी भी पक्ष के साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए।
हादसे और आगजनी के बीच प्रशासन की भूमिका पर सवाल
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने घटनाक्रम के समय को लेकर भी पुलिस-प्रशासन से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि हादसा दोपहर करीब 12 बजे हुआ, जबकि आगजनी की घटना शाम 6 से 7 बजे के बीच सामने आई। ऐसे में इन पांच से छह घंटों के दौरान प्रशासन ने तनाव कम करने और ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने के लिए क्या कदम उठाए?

उन्होंने समय रहते प्रभावी हस्तक्षेप नहीं होने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने स्थिति को गंभीरता से लिया होता और ग्रामीणों के साथ संवाद किया होता, तो तनाव को बढ़ने से रोकने की संभावना थी।
निर्दोष ग्रामीणों के साथ अन्याय न हो, मंत्री के सख्त निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन ग्रामीणों के खिलाफ उपद्रव या आगजनी में शामिल होने के ठोस साक्ष्य नहीं हैं, उनके विरुद्ध बिना आधार कार्रवाई न की जाए। हिरासत में लिए गए लोगों के मामलों की निष्पक्ष समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट या अमानवीय व्यवहार नहीं करने की सख्त हिदायत भी दी।
इसके साथ ही उन्होंने ट्रैक्टर, उसके मालिक, गिट्टी परिवहन और क्रशर संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने को कहा। मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात सामने आने पर उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

“जनता के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा”
पीड़ित परिवार और ग्रामीणों को भरोसा दिलाते हुए लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि क्षेत्र की जनता उनका परिवार है और किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और निर्दोष लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।
कुबेरपुर की घटना के बाद अब सड़क हादसे में महिला की मौत, गिट्टी परिवहन की वैधता, आगजनी के मामले में पुलिस की कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका जांच के प्रमुख बिंदु बन गए हैं। इन सभी पहलुओं पर निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
