October 24, 2026

शासन के आदेशों की अनदेखी या प्रशासनिक चूक? व्याख्याता की पदस्थापना को लेकर उठे गंभीर सवाल

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व्याख्याता संतोष साहू को मूल पदस्थापना पर भेजने की मांग, प्रतिनियुक्ति आदेश में जिला बदलने पर जांच की मांग


अंबिकापुर। शिक्षा विभाग में शिक्षकों के संलग्नीकरण और प्रतिनियुक्ति को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता परवेज आलम गांधी ने संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण सरगुजा संभाग को आवेदन सौंपकर व्याख्याता (गणित) संतोष साहू को उनके मूल पदस्थापना स्थल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सोनगरा, जिला सूरजपुर में तत्काल कार्यमुक्त किए जाने की मांग की है।


आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शासन द्वारा जिला एवं विकासखंड शिक्षा कार्यालयों में लंबे समय से संलग्न शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद संतोष साहू को उनके मूल विद्यालय भेजने के बजाय जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, सरगुजा से स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय, केशवपुर में कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई की गई।


आदेश में ‘सूरजपुर’ की जगह ‘सरगुजा’ दर्ज होने पर सवाल


मामले का सबसे गंभीर पहलू प्रतिनियुक्ति आदेश में दर्ज विवरण को बताया गया है। आवेदन के अनुसार, संतोष साहू की मूल पदस्थापना का जिला सूरजपुर है, जबकि संबंधित आदेश में मूल पदस्थापना जिला सरगुजा अंकित किया गया है।


आवेदक ने इसे प्रथम दृष्टया गंभीर प्रशासनिक त्रुटि अथवा तथ्यात्मक विसंगति बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। सवाल यह उठाया गया है कि यदि कर्मचारी की मूल पदस्थापना सूरजपुर जिले में है, तो आदेश में सरगुजा जिला किस आधार पर दर्ज किया गया और इसी आधार पर उन्हें जिले के भीतर बनाए रखने की कार्रवाई क्यों की गई?


शासन के आदेशों के पालन पर भी उठाए सवाल


आवेदन में 25 जून 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश तथा 23 जून 2026 की स्कूल शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक के निर्देशों का हवाला दिया गया है। आवेदक का कहना है कि इन निर्देशों का उद्देश्य लंबे समय से कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल पर वापस भेजना है।


ऐसे में संतोष साहू के मामले में अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्हें मूल पदस्थापना स्थल भेजने के बजाय जिले में ही बनाए रखने का प्रयास किया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी पर भी कार्रवाई की मांग


परवेज आलम गांधी ने इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अंबिकापुर दिनेश कुमार झा की भूमिका की भी जांच कराए जाने और यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।


आवेदन में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच करने, आदेश में जिला दर्ज करने में हुई त्रुटि के लिए जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में शासन के निर्देशों का सभी कर्मचारियों पर समान रूप से पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है।


जांच के बाद ही साफ होगी वास्तविक स्थिति


फिलहाल आवेदन में लगाए गए आरोपों पर संबंधित शिक्षा विभाग या अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए यह स्पष्ट होना बाकी है कि आदेश में जिला दर्ज करने की स्थिति वास्तविक प्रशासनिक त्रुटि थी या इसके पीछे कोई अन्य प्रक्रिया अथवा कारण था।


मामले में जांच होती है तो दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि शासन के निर्देशों का पालन हुआ या नहीं और प्रतिनियुक्ति/कार्य-मुक्ति की प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई थी या नहीं।

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